मूलमंत्र

आज सुबह सवेरे नई धोती व कुरता पहनकर बाबूजी ने बरामदे में रखी बाबासाहेब की मूर्ति को उतार कर पोछा और बगान से फूल तोड़कर माला बनाकर भीमसाब को पहना दिया। प्रणाम कर उनके समक्ष आँखें बंद करके चुपचाप खड़े रहे। पोते पोती दादा का यह कार्यक्रम देखकर आपस में इशारेबाजी कर रहे थे। अचानक दो बच्चे आपस में यह कहकर लड़ने लगे कि मोबाइल पहले मैं चलाऊंगा। आपस में लड़ते लड़ते मोबाइल पटक दिया और उसकी इतिश्री ने घर को रणक्षेत्र बना दिया। दादा जी की भक्ति भी न…

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