गजल

मौसमी प्रीत में अबके भरम आइल बा। राज रूप के जंगलन में भुलाइल बा।। संगे-संग पतझड़ का अगुआन बनके । बगियन में फूलन के बहार आइल बा।। जाने कइसे एक-दोसर के धरम बाँची। गवें से गांव में फेरू फाग आइल बा।। ऊ ना आपन मन के बात कहस कबहूँ। हमार जबान त जज्बात से सिआइल बा।। आँख से उनका आइल सनेस नेह के। होठ बाकिर इनकार में फड़फड़ाइल बा।। जिनगी इनकर-उनकर राह का ताकी। नजर में फरेब का दुनिया समाइल बा।। उनका हर पिआस के हल बा ‘कौशलʼ। दरद जिनका…

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