गँवई जिनगी का शब्द चित्र – काठ के रिस्ते

जब कवनों उठत अंगुरी के जबाव बनिके किताब सभका सोझा आवेलीं सन,त ओकरा से सहज में नेह-छोह जुड़िये जाला। मन-बेमन से कुछ लोग सोवागत करेला, ढेर लोग ओहसे दूरी बनावे के कोशिसो करत भेंटाला। भोजपुरी भाषा के किताबन के संगे घटे वाली अइसन घटना के सामान्य घटना मानल जाला। अंगुरी उठावे वाला लोग अफनाये लागेलन। उनुकर उठलकी अंगुरिया ढेर-थोर पीसात बुझाये लागेले। भोजपुरी में गद्य लेखकन के कमी त बा बाकि सुखाड़ नइखे। ‘काठ के रिस्ता’ के रिस्ता अइसने कुछ सवालन के जबाव लेके सोझा आइल बाटे। भोजपुरी भाषा खातिर…

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घरवा में बाटे न हरदिया, दरदिया……!!

का जमाना आ गयो भाया, मारे बरियरा रोवै न देस।  ई त लमहर आफत आइल बाटे भाई, पहिले लोग कड़ी निंदा से काम चला लेत रहलें,बाकि अचके में सुभाव काहें बदल लीहलें? शाकाहारी होखला का बादो हतना तेज झपट्टा, अचके में  बिसवास नइखे होत। अजबे हालत कर दीहलें यार, न कहते बनता आ न  सुनते | एह बेरी त बेसी थू – थू करा दीहल लोग सगरी दुनिया में। अब त रोवहूँ नइखे देत सन, अबले जेकरा आगु रो-गा के भीख मिल जात रहल ह, उ चीन्हलो से मना कर…

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माटी के सोन्हगर महक में सउनाइल ‘हूक-हुंकारी’

जब चारो-ओरी से उठत अवाजियन का उत्तर में कवनों किताब उपरियानी सन,त सहजे में सभे के अपना ओरी खींच लेनी सन। आजु भोजपुरी के युवा लेखक लोग अपना लेखनी से हर बातिन के बरियार जवाव दे रहल बा लो। एही से भोजपुरियो में निबन्ध, शोध आलेख आउर कहानियन के किताब छप रहल सन। महिना दू-महिना का भीतरि डॉ सुमन सिंह के 4-5 गो आइल किताबियन का हम एही रूप में देख रहल बानी। कई बरीस के कइल कामन के सहरियाय के ओकरा किताब का रूप दीहल, साँचो भोजपुरी माई के…

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मानवाधिकार मने रक्षा कवच बाक़िर केकर ….?

का जमाना आ गयो भाया, जेहर देखा ओहरे नटई फ़ारत कुछ लोग देखाइये जा तारन। माने भा मतलब कुछों होखे उनुका चिचिअइले से फुरसत नइखे लेवे के। सभे के आपन-आपन हित बाटे, केकरो अपना दोकनियों के चिंता करे के बा, त केकरो अपना जेब के चिंता बाटे। तनि हई न देखा, सभेले बेसी उहे नरियात देखात ह जेकर ई कुल्हि कइल-धइल बाटे।उनही के आंटा, उनही के घीव, कमरी ओढ़ि के झींक के पियतो बाड़ें आ दोष तवन दोसरा के लगावत बाड़े। आ क़हत का बाड़े कि इनका वोजह से हमरा…

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माई

माई माई हम पुकरेनी कतहूं माई ना हमार हमनी के छोर के कहा गइलू हो तोहरा बिन सुना बा संसार एक ही बार लौट के तू आ जाइतू हो तोहसे कई लेती प्यार जब तुहू धरती पे रहालू हो धरती स्वर्ग समान अब तुहु कहवा चल गइलू हो मनवा भईल बा बेहाल कहे के सब केहू आपन हो तोहरा बिन केहू ना हमार शरीर हमार जान तोहार रहे हो तोहरा बिन ईहो भईल बेजान माई माई हम पुकारेनी हो कतहूं माई ना हमार दिनवा त कसहू कट जाला हो रतिया…

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