माई

कि जग में माई बिना केहुए सहाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि सुख दुःख रत्तिया दिनवा सहली कबहीं मुह से कुछ ना कहली कि उनका अंचरा से बढ़ी के रजाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि अपने सुखल पाकल खाके रखली सभ के भरम बचा के कि उनकर रोवाँ जे दुखाई त भलाई ना होई केहु कतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि देवता देवी रोज मनावे हमरे खातिर रोवे गावे उनका नेहिया से बढ़ी के दवाई ना…

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बड़ा-बड़ा फेरा बा

बड़ा-बड़ा फेरा बा भारी झमेला बा तिलक त लेबे के मन नइखे समधी जी दहेज के पेंच लगावे के सरधा एकदम नइखे समधी जी बाकी हई ……. नाच ह बाजा ह खजुली ह खाजा ह साज ह समैना ह बीजे ह बैना ह गांव ह जवार ह गोतिया देयाद ह हीत ह हीतारथ ह सभके सवारथ ह हरिस ह कलसा ह गउरी गनेसा ह पुजा ह पतरा ह देवतन के असरा ह गहना ह गुरिया ह पवनी पनहरिया ह सूट ह साड़ी ह डोली ह गाड़ी ह कोकड़वर ह बुकवा…

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