कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS।

भुखिया बिसारि रोज जमुना नहा लS। कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS। लरिका गुवालन के रोज- रोज तोहे भरमा लिआ जालें, हम लागीं जोहे देखेलS हमके त कुंजन लुका लS। रधिकी ह अधिकी ऊ अधिका बनाई छाछ देई चिरूआ भरि तहके पोल्हाई ओकरा बोलवला पर कोस- कोस जालS। सँझिया- बिहान नाहीं होला पढ़ाई गलियन में घूमि- घूमि ठानS लड़ाई मनसुख बदे काहें रोजे पिटालS? घर के ना खालS, करे जालS चोरी ओरहन सुनावेली घर- घर के गोरी मइया क, बाबा के इज्जति बचा लS। संगीत सुभाष, मुसहरी, गोपालगंज।

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भोजपुरी साहित्य सरिता के ISSN मिलल

भोजपुरी मासिक पत्रिका “भोजपुरी साहित्य सरिता” के ISSN  मिलल। शतत लागल रहला के फल आज मिलिये गइल। बहिनी डॉ सुमन सिंह के हूरपेटल आ अनुज केशव मोहन पाण्डेय के साथ आ नेह फेर जुझारू बनि के कुछ सोझा राखे के चाह से आज जवन पल भेंटाइल ह,ओकरा के 2 बरीस से जोहत रहनी ह। असफलता दर असफलता के बादो लागल रहला के नतीजा आज मिलिये गइल। भोजपुरी साहित्य सरिता के issn———

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