भोजपुरी लोकगीत के अनन्य साधक: श्री जगन्नाथ मिश्र

“गांगा मिलती त खुब नहइती अम्मा मिलती त खुब बतिअइती”   आदरणीय नामवर सिंह जी के भोजपुरी भाषा के बारे व्यक्त कइल गइल ऊपरोक्त उदगार के अक्षरस: चरितार्थ करेवाला, श्री जगन्नाथ मिश्र जी (घर पिंजरोई ,थाना संदेश,जिला आरा पेशा-विज्ञान शिक्षक ,टउन स्कूल आरा) के, हमनी के भोजपुरी लोकगीतन के जनक, प्रतिष्ठापक,  प्रष्कोटा,  संकल्पक,  अन्वेषक, या पुनर-सर्जक, ए में से कवनों विभूषण से विभूषित करी, ई  सब इन कर हिमालय जइसन व्यक्तित्व के सामने बौना हो जाई। बौना होखें लाइक बतिये बा, कहे कि, जवना लोक गीतन के, हमार आज के…

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चेतावनी पाकिस्तान के

अइसन पड़ोसी मिलल,निपटे अनाड़ी धीकल। सीजफायर तुड़ के,बढ़ावत हमार खीस बा।। खइला- छइला बिनु टुटल,चीन के हांथे बा बिकल। भाड़ा के गोहार प, बनत चार-सौ-बीस बा।। बने ला अमीर चंद,घर में करे मुसरी दंड। भोजुआ तेली बनत, भोज महाराज बा।। करजा में डुबल आकंठ, तबहुं अतना घमंड। एटम बम के धमकी से,लोग के डेरावत बा।। लुकी-छीपी करे घात,लात के देवता ना माने ना बात। आईके सीमा पररोज, रेड़ ई बेसाहता।। पंच के सुनेना बात, करे राड़ दिन रात। असहीं बिनास आपन,अपने बोलावता।। धरती के स्वर्ग पर,पपियन के भेजी कर। नरको…

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