हारब त हूरब,जीतब त थूरब

जादू टोना, दख्खिन कोना बाति-बाति पर रोना-धोना जाइब पश्चिम आ बोलब पूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   करब बहाना मारब ताना ठेंगे ऊपर रखब जमाना बेगर बात के टंगरी तूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   उपरल सोर डेहुंगी सूखल भंडारी रहलें कुल्हि भूखल अनकहले सुरुजो के घूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   इहाँ उहाँ बस उगिलब आग अनियासे छेड़ब खट राग धरम जाति के पेंगला पूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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