परसुराम सुमिरन

जमदग्नि सुत के सजी दरबार सखिया परसुराम जी के फिरो पुकार सखिया ॥ श्रेष्ठ रिसिन मे बाटे जेकर किरितिया बाबू के खातिर जेकर चर्चित पिरितिया उनका हिया के अँगना मे उतार सखिया ॥ कन्हिया सोहे जेकरे तिरिया धनुहिया हाथे फरुहा पुरहर शास्त्रन के रहिया उनका पउवाँ के लोर से पखार सखिया ॥ मही बिहीन अरि से कइने धरतिया लौटि फेरु आईं बाबा धूमिल थतिया अहो हर बेरी उनही के निहार सखिया ॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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