माई रोवत बाड़ी

भोरे भीनसहरे धsके,भर अँकवारी माई रोवत बाड़ी, बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। सखी आ सहेली सभके अखियाँ लोराइल, छूटे के साथ बेरा जब समय नियराइल। ससुरा में रहिहs नींक से, कानवाँ में माई सिखावत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। देखे सुने वाला लोग के हो फाटेला करेजा, ओही में कहे केहू डोली हाली से ले जा। कुछ देर ठहर जा कहरु, हाथ जोरि माई कहत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। कइसे मनावल जाव दीपक सोचs तरीका, चेहरा के रंग देखs हो पर…

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