फागुन महीनवां

सरसों क कटिया-करत गोरी बतिया घरवां ना बलमू-कटेले सूनी रतिया फागुन महीनवां-बलम कलकतिया अगिया लगल तन-जरे मोरि छतिया चहके चिरईया-बोलेला बन मोरवा कुहूँके कोयलिया-निगोरी पिछवरवाँ आधी-आधी रतिया-उदासल$महोखवा बिहरेले छतिया-फगुनवां क रतिया पतझर पतईया-झरेले-झर अंखिया चढ़ली उमिरिया-झुराले रस देहियां आवें अनवईया-बोलावें मोरि सखियां जोहत डगरिया-बेकल दिन-रतिया बहे फगुनहटा-उड़ावेला अंचरवा फूले फूल फूलवा-बोलावत भँवरवा आवा हे सुगनवां-उदास मोरि खोतवा अमवा बऊर रस-लागे ना टिकोरवा राकेश कुमार पाण्डेय हुरमुजपुर,सादात गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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शहरी मॉडल

नयी नवेली आइल बानी , सगरो साध पुरइबे करब, ना होई फरमाइस पूरा डंडा रोज गीरइबे करब। पढ़ल-लिखल हम त बानी अँग्रेजी बतीयइबे करब, हप्ता भर में तीन सीनेमा ना देखब कोहनइबे करब ।। साड़ी-सूट कबो ना पहीनब जीन्स पाइंट पहीनब करब अँग्रेजी के सी०डी० कैसेट घर में रोज बजइबे करब ।। गाल पे पाउडर, होठ में लाली, रोज-रोज लगइबे करब, शहर के ब्यूटी पार्लर में बॉब हेयर कटवइबे करब।। सास के कुछउ बुझब ना ससुर से खाना बनवइबे करब जहीया ऊँ कुछु कहीहे  त?? उठाइ बेलना हम पीटबे करब।।…

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