तहार सुधिया

आज कँगना खनका गइल,तहार सुधिया। मन के तार झनका गइल,तहार सुधिया॥   बहि रहल लोर संग नेह क खजाना बदरी बनल बा अंजोरिया के बहाना कान करकत झुमका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–   एने-ओने हेरत मोहनी सुरतिया मनवाँ बसल बाटे रउरी मुरतिया अबकी बेर तिनका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–   सपने में आइल रहल काँच निनियाँ अलसाइल लागल प्रेम के किरिनियाँ गरे लिपटी मनका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी  

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जय शिव शंकर

बसहा बैलवा के शिव क के सवारी, तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारि।   औघड़ दानी हउँए सभका से उ निराला, जटा में गंगा मइया गरवा में सर्प माला। कष्ट मिटावे सभकर हउँए उ पापsहारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   क्षण में बना उ देले क्षण में बिगाड़ देले, खुश होले जब भोला सभ कुछ भर देले। धन दौलत सुख शांति देले घरs अटारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   कुपित होले जब उ खोलेले तीसरा अखियाँ, काँपे लागेला सभे केहूँ नाही पारे झकियाँ। मातल रहेले खाके…

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साँझवा बिहानवा

तहरे में डुबल रहेला साँझवा बिहानवा, तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   हटे के ना चाहेला हो सोझवा से ताहरा, एतना लगाव तोहसे भइल कइसे गाहरा। हामारा प देई दना तनिसा तू धेयानवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   व्याकुल रहेला हरदम मिले खाती तोहसे, करेला लड़ाई हरमेश तोहरा खाती हमसे। बदलs इरादा अबो सुन लs वचनवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   खुशी बहुते मिलेला हो तोहरा के देखी के, दीपक तिवारी कुछो कह तारे लिखी के। करs विचार ना त ले लs…

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शक्ति स्वरूपा

घर के मान मर्यादा के, ख्याल राखेली नारी। शक्ति स्वरूपा हई जेके, जग अबला कहे नारी।   उनुका चलते हम सभ बानी, उ हमनीन से नइखी। जइसन समझत बानी जा, शायद उ ओइसन नइखी।   माँ के फरज निभावस, ममता लुटावस नारी। कदर करs तू ओकर, ओके कबो ना दिहs गारी।   दुर्गा चंडी काली के, एगो रूप हई हो नारी। बिगड़ जइहें त प्रलय होई, असहाय ना हई नारी।   बहिन बनके बाँहेलि राखि, स्त्री बन के करेली सेवा। निःस्वार्थ भाव से करेली सभ कुछ, कबो माँगेली ना खेवा।…

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