फागुन, आव न हमरे गाँव

फागुन, आव न हमरे गाँव। अनमन हवा अकारथ डोले, पीपर थिर बनमुरुगी बोले, कहईं दूर सियारी लावलि, स्वारथ के कुछ दाँव। कोंच भरल महुवो उझंख तन, फेरल कवन लुकारि सबुज बन, झरकि गाछि पतई बिनु ठाढ़े, गुमसुम गाँव-गिराँव। काँटन के सोरी में पानी डालत रहलन साँझ-बिहानी उहई फूल दिलासा लिहले धउगल खलिहे पाँव। सनकेशी रानी अइली हऽ, कहवाँ कुछ बतिया पइली हऽ, गमी भरल मासूम नजर में छलकत दुख गहिराँव। अब ना बीरन खींचस चोटी, अब ना काटस चिबुक चिकोटी, कौन आँक गइलसि तबूत प बीरन के बड़ नाँव।   दिनेश…

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जोर-शोर से उठल भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के मांग

नई दिल्‍ली: भोजपुरी के संविधान के  आठवीं अनुसूची में शामिल करे  के  मांग एक बेर फेर  बहुत जोर-शोर से उठावाल  गइल। अवसर रहल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विश्व भोजपुरी सम्मेलन आ भोजपुरी समाज दिल्‍ली के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्‍ट्रीय मातृ भाषा दिवस के अवसर पर आयोजित ‘भोजपुरी हमार माँ – मनन, मंथन और मंतव्‍य’ विषयक विचार गोष्‍ठी के । मुख्य अतिथि श्री हरिवंश, उपसभापति राज्यसभा रहने । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आ  राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश ने कहने  कि भोजपुरियन  में बहुत ऊर्जा बाटे। ओह ऊर्जा के सदुपयोग…

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