माटी क जाँता

कातिक पुन्वासी क दिन सबेरवै से साफ सफाई मे लगल रहली।छुट्टी क दिन रहेला त अउर काम बढलै जाला, अबही कपड़न के घाम देखावै के बा ।चारू अक्षत गरे से लिपट गइनै । “अम्मा घूमे चला।” ” कहवाँ चली हमार राजा बेटा” “माल चला न।” अच्छा ठीक बा….। हमार चार साल क बेटा के माल जाये के नशा सवार रहेला। हमहू जैइसे -तइसे काम समेट के दोनो बच्चन के लेके चल दिहनी।शहर मे भीड़-भाड़ बढ़लै जाला।सबके जल्दी जाये क अइसन होड़ मचल रहेले की पुछा मत। बनारस क जाम त…

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