हमार गांव

हमार गांव ना अइसन तइसन
सगरो गांव से भारी बा
खेती बारी दूर भइल
ना खुरपा बा ना कुदारी बा
 
खेती में खूब काम भइल
उ मेहनत ना जारी बा
हरीश रकेश मौज में बारे
मुंह मे सब दिन गारी बा
 
बाबा के खीस पर डर समाइल
अंजुवो मन पर भारी बा
कइसे कहीं बात ओहदिन के
अंजुवो ले निकझारी बा
 
गांव गांव ह ऊपर नीचे
केकरा काम के के खींचे
सवसेे अब त भइले बबुआ
खेती लागत बेमारी बा
खाँची खचोली लउकत नइखे
गोबर गोइठा कतहु नइखे
घर घर माचिस घर घर तीली
कहवो ना एगो अंगारी बा
 
गडई भर कुंदन तुरहा
गईल चना मटर के होरहा
कईसे मिली पुरनका गोरस
काम कइल जहां भारी बा
 
आदमी भूत लडले जब खुब
केकरा देह में बावे उ हूब
सब शफा चट बा भाई
नौकरी आज महामारी बा ।
 
ना खुरपा बा ना कुदारी बा।
– पथिक

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