स्मृति शेष (विशेष)

परम पूज्य महामना मदन मोहन मालवीय जी एक युग महापुरुष रहनै। 25 दिसंबर 1861 ई0 में पंडित ब्रजनाथ आउर श्रीमती मुन्ना देवी के बेटा के रूप में जन्म लेहनै । ब्रजनाथ व्यास जी के पवित्र आउर  सात्विक गुड़न क भरपूर प्रभाव मदन मोहन मालवीय जी में बचपने  से दिखाए लगल । घर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद उनके पंडित हरदेव जी के धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला मे भेजल गयल। पंडित जी अपने शिष्यन के अपने बचवा जैसे मानै। दूध पियावै अउर कसरत करावै । कुश्ती भी लड़वावै । उनकर इहे ध्येय रहे । शारीरिक बल पर बहुत ध्यान दें, प्रत्येक विद्यार्थी के शरीर से बलवान रहेके चाही ।  स्वस्थ शरीर स्वस्थ मन स्वस्थ विचार के साथ प्रत्येक विद्यार्थी का जीवन आगे बढ़े के चाही । एह  बात क सबसे ज्यादा प्रभाव मालवीय जी पर पड़ल आउर आगे चलके मालवीय जी अपने विश्वविद्यालय के कुल्हि छात्रन  क शरीर बलवान हो आ उ विद्वान चरित्रवान देशभक्त आउर  इश्वर भक्त हो , एह बात क ध्यान रखनै ।  उनके कहना इहै रहे कि –

 

दूध पियो कसरत करो नित्य ले हरि नाम

मन लगाए विद्या पढ़ो पूरेगे सब काम ।

 

एही खातिर विश्वविद्यालय में गौशाला बनावल गइल।  मालवीय जी के  कहना रहे कि विद्यार्थियों को दूध पीए के चाही ,अच्छा दूध मिले एकरे बदे  ओकर  व्यवस्था होवे के चाही  आ ओकर व्यवस्था विश्वविद्यालय में ही हो । कसरत करे के चाही जवने से  शरीर स्वस्थ रहे। महामना मालवीय जी बहुत ही धर्म निष्ठ व्यक्ति रहने ।  उनके बदे  हर व्यक्ति बराबर रहे  चाहे कवनो जाति वर्ण- धर्म क रहे । मेहतरन के संबंध में उनकर बडा़ साफ दृष्टिकोण रहल । मालवीय जी क कहना इहै रहे कि हमार वेद -पुरान इहै कहेला कि हमरे हिंदू जाति के अंदर सब जाति ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब एक ही शरीर के अंग हवे ।  हम सभी लोगन  के  काम मेहतर लोग करै न । अगर हमने के थोड़ी स माटी लग जाए या केहू फेंक दे त, हमनी के बवाल मचा देवल जाला बाकि इ विचारे लोग त पूरे गांव क मैला अपने सिर पर उठावै न। एक दिन ना, एक सप्ताह ना बल्कि केतने युग से ना बल्कि कितने युग से इ लोग इहै काम करै न। उनके हित के ध्यान में रखेंके चाही। रोजगार त उनके आउर मिल जाइ बाकि उनके सेवा के बिना हम लोगन क का दशा होई । महामना बतवलन कि आज तक हमरा अइसन कउनो भंगी ना मिलल जवन कि बिना नहइले बिना खाना खात हो । प्रयाग में एक मेहतरानी क जिक्र करैनै कि उ बडी़ सात्विक बिचारधारा क रहें । पूरे नेम वरत के साथ आपन पूजा पाठ करें। रहे मालवीय जी हमेशा जीवन पर्यंत ब्रहमचर्य व्यायाम पर बहुत जोर दे । ब्रहमचर्य के साथ-साथ व्यायाम बहुत जरुरी ह। पुरुष के शक्तिशाली रहे के चाही ।जवन पुरुष अपने माता बहिन पत्नी की रक्षा ना कर सकेला ओके जीयें क क उनो हक, अधिकार ना बा। एही से हमार इच्छा ह कि हमरे देश के प्रत्येक व्यक्ति बलवान हो । स्वस्थ हो मंदिर आउर मूर्तियन  के संबंध में उनकर इहै कहना रहे कि यदि मुझे ठाकुर जी के दर्शन से कोई ना रोकेला त हमरे अछूत भाई बहन के भी मत रोकल जाय काहे के कि उन कर दिल हम लोगन से ज्यादा पवित्र बा। मैल क संबंध वस्त्र से ,अउर शरीर से ह जवन धोयें अउर नहाये से साफ हो सकेला। आत्मा के साथ ओकर संबंध ना ह । तू ओकरे  आत्मा के देखा.। उ ज्यादा पवित्र ह ।

 

  • डॉ ऋचा सिंह

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