सिंगार

*[01]*
पियवा जतन करे, मनवा मगन रहे,
पग के नुपूर तब, झनके झनकि झनन।
पिक करे कुकु कुकु,हिय करे हुकु हुकु,
चमन निरेखि कली,अलि देखि सनकि मन।।
*[02]*
आँखि में कजरा डारि,केस में गजरा झारि,
सोरहो सिंगार करि,चलतु धनि बनि ठनि।
लंगहा लहार मारे, चुनरी ओहार करे,
देखे लो ठहर जाये, बोलतु नहि तनि मनि।।
*[03]*
ओठ भोरवा के कोर तन शशि जस गोर,
देखि ललचे चकोर,महके गमकि गमक।
अति कोमल कोपल,मधु बोल अनमोल,
घोरे मिसरी के घोल,चहके सहकि बहक।।
*[04]*
हिया हिलकोर मारे,मार बड़ी जोर मारे
पूरा पोरे पोर मारे, मन जीव हहरि मरि।
हरियर मन रहे,मन में लगन रहे,
सजना तपन मरे,बहुरिया अगन जरि।।
*[05]*
देवरा दुआर पर,ननदी अटार पर,
ससुई इनार पर, सजनिया तरसि मरि।
प्यार आरपार रहे, मन उजियार रहे,
सजना बदरा बनि, सेजरिया बरसि झरि।।

  • अमरेन्द्र कुमार सिंह
    आरा (भोजपुर) बिहार

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