साँझवा बिहानवा

तहरे में डुबल रहेला साँझवा बिहानवा,
तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।
 
हटे के ना चाहेला हो सोझवा से ताहरा,
एतना लगाव तोहसे भइल कइसे गाहरा।
हामारा प देई दना तनिसा तू धेयानवा…
तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।
 
व्याकुल रहेला हरदम मिले खाती तोहसे,
करेला लड़ाई हरमेश तोहरा खाती हमसे।
बदलs इरादा अबो सुन लs वचनवा…
तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।
 
खुशी बहुते मिलेला हो तोहरा के देखी के,
दीपक तिवारी कुछो कह तारे लिखी के।
करs विचार ना त ले लs मोर परानवा…
तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।
 
दीपक तिवारी…
श्रीकरपुर, सिवान।

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