“भोजपुरी साहित्य सरिता” अंक-सितम्बर राजेश बादल जी के नजर से

पत्रिका : भोजपुरी साहित्य सरिता
संपादक : जयशंकर प्रसाद द्विवेदी (जे.पी. द्विवेदी)।
प्रकाशक : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली।
ISSN : 2582-1342
पता : 15/ए, मानसरोवर, लालकुआं, गाजियाबाद उत्तर प्रदेश ।
चलभाष : 09999614657.
बड़ी रोचक कहानी ह । बरहुआ, चकिया, चंदौली में जन्मल जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी, बीटेक कईला के बाद इंजीनियरिंग कईले और अब लगातार भोजपुरी भाषा के विकास खातिर काम करत बाड़न । जउना भोजपुरी के लोग गांव क भाषा कहेला, उनका के उ भाषा के प्रति एतना लगाव बाटे कि पढ़ल-लिखल होखला के बाद भी उ सगरी भोजपुरिये में बात करेंल । उनकरा के सब लोग प्यार में भइया ही कहेला । जे पी भइया के भोजपुरी भाषा खातिर कईगो पुरस्कार अउरी सम्मान मिल चुकल बाटे ।
एगो पत्रिका जेकर नाम बाटे “भोजपुरी साहित्य सरिता” जेकरा के संपादन उ पांच साल से करत बाड़न । पहिला अंक जब हमके मिलल । देख के तबेत खुश हो गइल । ग़जब क पत्रिका बा भइया । एक बेरी पढ़ला के बाद बार-बार पढ़े क मन करेला । ए पत्रिका क जवन आवरण अउरी विषयवस्तु बा उ स्तरीय बा ।
अबही टटका अंक हमरा के मिलल ह । हम त एकदम से ए पत्रिका क दीवाना हो गइल बाटी । एह अंक में संपादकीय बड़ी बेजोड़ बा । लेख अउरी निबंध में डॉ जयकान्त सिंह ‘जय’ के शोधपरक लेख ‘संतकबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि विचार’ बहुत सुंदर अउरी सारगर्भित बा । “साहित्यिक चोरी- समस्या आ समाधान” रवि प्रकाश सूरज द्वारा लिखल बा जनव आज के संदर्भ में बहुत ही प्रासंगिक लेख बा ।
कविता भी बड़ी अच्छी-अच्छी बाड़ी स । जवना में “मोर नंहका बेटउआ” संपादक द्वारा लिखल गइल बा । बड़ी ही मजेदार हास्य कविता ह । साथ ही में ‘का का मन परे खेत के मचान पर’ कुमार जीवन सिंह, सन्नी भारद्वाज लिखले बाड़न- ‘का रे छगुनिया खाली सवत के दोष ह’ पढ़े लायक कविता ह । एहमा एगो हमरो कविता छपल बा ‘पहिले क बारिश’ पढ़ला पर जरूर उ दिन याद आ जाई जब चढ़ते अषाढ़ मार धुँवाधार बरसात होत रहे ।
कहानी भी लिखल बाड़ी स । ‘दुलहिन के बाबुजी’ अंकुश्री बड़ी खूबी अउरी बारीकी से लिखले बाड़न अउरी एक कहानी ‘जामुआव के संत निराला बाबा’ डॉ हरेश्वर राय द्वारा लिखल गइल बा जवन अंत तक पढले खातिर मजबूर कर देले ।
एकरे अलावा ए पत्रिका में समीक्षा अउरी भोजपुरी पर चर्चा परिचर्चा भी हर अंक में छपेला । कुल मिलाके ई पत्रिका कम समय में अपन बड़ी जगह बना लेहले बा । जहाँ आज के समय में पत्रिकन क भरमार लगल बा उ समय में बड़ी हिम्मत क काम जे पी द्विवेदी भइया कय रहल बाड़न।
संपादक जी अउरी पत्रिका परिवार के हमरा तरफ से अनघा बधाई अउरी शुभकामना बा । भइया पर अइसही माई सरस्वती क किरिपा बनल रहे ।
_राजेश बादल
कवि/लेखक/समीक्षक
चकिया, चंदौली, उ0प्र0।
मो.9453562700

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