शक्ति स्वरूपा

घर के मान मर्यादा के,
ख्याल राखेली नारी।
शक्ति स्वरूपा हई जेके,
जग अबला कहे नारी।
 
उनुका चलते हम सभ बानी,
उ हमनीन से नइखी।
जइसन समझत बानी जा,
शायद उ ओइसन नइखी।
 
माँ के फरज निभावस,
ममता लुटावस नारी।
कदर करs तू ओकर,
ओके कबो ना दिहs गारी।
 
दुर्गा चंडी काली के,
एगो रूप हई हो नारी।
बिगड़ जइहें त प्रलय होई,
असहाय ना हई नारी।
 
बहिन बनके बाँहेलि राखि,
स्त्री बन के करेली सेवा।
निःस्वार्थ भाव से करेली सभ कुछ,
कबो माँगेली ना खेवा।
 
देर ना करs पहचाने में,
नारी रहली झांसी के रानी।
जीवन देली तोहरा के,
हई उ बड़का दानी।
 
जवना घर में मान मिले,
लक्ष्मी रूपी नारी के।
विष्णु स्वयम रक्षा करे,
ओकरा फुलवारी के।
 
सम्मान करs तू इज्जत बक्सs,
आज से हरेक नारी के।
बात मान के आगे बढ़s,
एगो दीपक तिवारी के।
 
दीपक तिवारी…..
श्रीकरपुर, सिवान।

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