मुसवा चालल सगरी भीत

कंकर जोरि घरौना पारल।
नीसन धरन छान्ह सहियारल।
तुंग अटारी चढ़ि के मनुआँ, 
गावे मनसल गीत।
मुसवा चालत रहलसि भीत।

सघन गिलावा भरक रहल अब।
ईंटा के सन्ह दरक रहल सब।
भर घर छितरावल मुसकइला,
लेंड़ी परल पछीत।
मुसवा खोंखड़ कइलसि भीत।

ऊपर से गवदी अस लागस
तरे निछोही घावे दागस
अनकर अन पऽ डीठ गड़ावल
इनिके इहई रीत।
मुसवा चालत गइलसि भीत।

बीअर कइलसि कोने-सानी।
कतिना केहू डाली पानी?
हूरत-मूनत बुद्धि हिरानी।
कइलसि हदे अनीत,
मुसवा चालल टटको भीत।

मूँड़ सूँढ़ गनगौर अकारथ।
थोथवे कुतुर रहल परमारथ।
घर-घरवैयो, सुटुक बिलैयो,
बतिया थोरे तीत।
मुसवा चालत बड़ुवे भीत।

  • दिनेश पाण्डेय,
    पटना।

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