माई

कि जग में माई बिना केहुए सहाई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

कि सुख दुःख रत्तिया दिनवा सहली
कबहीं मुह से कुछ ना कहली
कि उनका अंचरा से बढ़ी के रजाई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

कि अपने सुखल पाकल खाके
रखली सभ के भरम बचा के
कि उनकर रोवाँ जे दुखाई त भलाई ना होई
केहु कतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

कि देवता देवी रोज मनावे हमरे खातिर रोवे गावे
उनका नेहिया से बढ़ी के दवाई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

रुपया पैसा लाख कमईब
सुंदर रंग महल बनवइब
सुंदर रंग महल बनवइब
कि रुपया पैसा लाख कमईब
उनका सेवा से त बढ़ी के कमाई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

त माई आखिर माई होली अमृत जइसन जेकर बोली
उनका बोलिया से मीठ त मिठाई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥

 

महिमा माई के बा भारी चरनन में सुभाष बलिहारी
कि कवनो देवी के भी ओइसन सुंदरताई ना होई
केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई !!

 

  • सुभाष यादव

 

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