मच्छड़ महराज के प्रार्थना

हे मच्छड़ महराज
तनी सिकोड़ीं आपन राज
सँउसे दुनिया में फइलल बा
रउवे त समराज
हे मच्छड़ महराज !
वियतनाम के
लोक कथा के मादा मच्छड़ हईं का
रउवे वंशज खून चूस के
मुआ रहल बा कहीं का
अबहूँ त रोकीं आपन ई लहू चूसनी साज
हे मच्छड़ महराज !
आके हमरा कान भीरी
ई कवन गीत सुनाइईंला
चूस चूस के खून देह के
सँउसे रात जगाईंला
हंगामा फइला के सगरो करींला आपन काज
हे मच्छड़ महराज !
क्वायल,गुडनाइट, आल आउट
सब बा भइल नाकाम
मच्छड़दानी मे कब तक रहीं
जीयल भइल हराम
भनभनात बाड़न रउवे गन
गिरावत गाज
हे मच्छड़ महराज !
घर, दुआर, बाजार, बगइचा
भा कवनो गाड़ी में
खेत,बधार भा मंदिर महजिद
भा कवनो फुलवाड़ी में
रउवा करह मचवले बानी
पहिर के नीमन ताज
हे मच्छड़ महराज !
अब त फूल फुलाए दीहीं
उफनत एह बसंत में
गरमाई धरती त रउवा
माटी में मिलब अंत में
अधकट्टी मोछियावाला के दीहींला काहें दाज
हे मच्छड़ महराज !
मोजराइल बा आम बहुत
महुओ सगरो कुचियाइल
आवेवाला बा बसंत के राज
बयार धधाइल
काहें चूसक सूँढ़ प रउवा कइले बानी नाज
हे मच्छड़ महराज !
कतने रोग बिआध बढ़वनी
काटि काटि के रउवा
काटि के सँउसे देह में दिहनी
दोदरा अवरू घउवा
मरे दवाई बिना ई कांटक अवरू सकल समाज
हे मच्छड़ महराज !
लहर सिकोरीं कंठ न काटीं
मत ककुलहट दीहीं
सभका के रहे दीं अहथिर
सुख फगुनहट लीहीं
झूठो फुरो सतावत बानी लागे ना तनिको लाज
हे मच्छड़ महराज !
हे हे मच्छड़ महराज !!
* * *
  •  सुरेश कांटक

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