‘भोजपुरी साहित्य में महिला रचनाकारन के भूमिका’ नामक पुस्तक के लोकार्पण आ परिचर्चा

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का पूर्व संध्या पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ‘भोजपुरी अध्ययन केंद्र’ कला संकाय के राहुल सभागार में केंद्र के समन्वयक प्रो० श्रीप्रकाश शुक्ल जी का अध्यक्षता में भोजपुरी पुस्तक ‘भोजपुरी साहित्य में महिला राचनाकारन के भूमिका’ नामक पुस्तक के लोकार्पण आ सह परिचर्चा के आयोजन कइल गइल।

एह कार्यक्रम के आयोजन शोध संवाद समूह आ सर्व भाषा ट्रष्ट नई दिल्ली का संयुक्त तत्वावधान में कइल गइल। सबसे पहिले कार्यक्रम का शुरुवात प्रेरणास्रोत पंडित मदन मोहन मालवीय जी के मूर्ति पर माल्यार्पण करत विश्वविद्यालय के कुलगीत गायन आ अतिथियन के सम्मानित करते शुरू कइल गइल। सम्मान के ओही क्रम में डॉ. सुमन सिंह जी के उनकर पहलकी भोजपुरी किताबि ‘बात-बतकही’ के खाति ‘पं धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान 2019’ दीहल गइल।

अपने अध्यक्षीय संभाषण में शुक्ल जी सबसे पहिले सभे के आभार जतवलें आ कहलन कि ई किताबि साहित्य आ संवेदना के वाहक का संगे संवृद्धिओ बा। एह विषय में आजु के महिला रचनाकारन में मौखिक से लिखित का ओर बढ़े के शुरुवात में महिला लोगिन के केतनी पीड़ा झेलS परल बा ओकरा के व्यक्त करे के खाति हमनी के मेहरारून के सराहे के जरूरत बा। एह कार्यक्रम के जब पहिला चर्चा भइल रहे तबे एह कार्यक्रम के तिथि ढेर सोच समझ के राखल गइल रहे। आजु क दिन ख़ासकर स्त्री के पक्ष में ओनही लोगन के बातिन के जिकिर नीमन लागल। काहे से कि आजु अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस बा। ई बेहद सौभाग्य के बात बा।

प्रोफेसर शुक्ल जी कहलें कि “ई किताब भोजपुरी भाषा मे महिला रचनाकारन के जीवन्त दस्तावेज़ हौ। आ इहों कहलें कि आजु के समय में अपने अधिकार खाति अपना बाति राखे के जीयत-जागत उदाहरण भोजपुरी हौ। किताबि क तारीफ करत कहलें कि आजु के मेहरारू अपने अस्मिता के लड़ाई भोजपुरी के आपन हथियार बना के लड़ रहल बाटे, आ

ओहमे सफल होत देखात बाटे।”

स्वागत वक्तव्य में आपन बात राखत संपादक केशव मोहन पाण्डेय जी कहनी कि एह किताबि का प्रकाशन एक सतत प्रयास से संभव भइल। एह किताबि में बतकही, कविता, कहानी, आउर साक्षात्कारन के  एह किताबि में जगह दीहल गइल बा। सर्व भाषा ट्रस्ट का ओर से देश के भाषा आ बोलियन  के जोड़े के काम सर्वभाषा पत्रिका के माध्यम से कइल जा रहल बा। संगही ई ट्रस्ट देश के कुल्हि भाषिक क्षेत्रन के कवि लोगन के सम्मानितो कइल जा रहल बा। संगही आउर कई गो नीमन बातिन के जिकिर कइलें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध न्यूरो चिकित्सक आ समाजसेवी प्रो० विजयनाथ मिश्र जी रहनी।उहो आपन बात राखत बेरा कहने कि भोजपुरी के पहचान क निशानी गमछा अउर लाठी हौ। हमहन के किताबन के खरीदे अउर पढ़े के चाही। ई सवाल बार-बार जेहन में त उठि जाला बाकिर जेकरा के भोजपुरिया से कउनो नाता न होखे ओकरो के भोजपुरी जाने अउर समझे के पड़ेला।

आगु कहलें कि हमहन मेडिकल के क्षेत्र में बानी अउर मरीजन के भाषा समझे खातिर हमहन के भोजपुरी के पढ़े अउर ओकर ज्ञान रखे के पड़ेला, काहे के कबौं जब गरीब लोग जवना के खासकर गांव-गिरांव से आवेने, उ जब हमने से कहने के डॉक्टर साहब हमार गोड़ दुखात हौ, कपार दुखात हौ, हमके भूख ना लगत हौ। ई पजरिया फाटत हौ त हमके ओह लोगन के भाषा समझे खातिर ई भोजपुरी भाषा के अच्छे से पढ़े आउर  समझे के पड़ी।
मुख्य वक्ता का रूप में आपन बात राखत वरिष्ठ आलोचक प्रो०अर्जुन तिवारी जी कहने कि….. हमरा के सब किताब अच्छा लगेला बाकिर ई किताब बहुतै अच्छा लागल, एकर कारण ई बा कि जवने समय मे हमरे समाज के लोग हिंदी अउर अँग्रेजी के पीछे भागत हवें ओ समय मे भोजपुरी में खासकर महिला रचनाकारन के लिखल लेख, कविता,कहानी पढ़े अउर ओ समाज के समझे के खातिर जवन अवसर मिलल बा ये बदे हमरा के बहुतै खुशी होत बा। डॉ तिवारी एह किताब के कई रचनाकारन आ उनका रचनन के कई पक्तियन आ कई रचनाकारन पर बिस्तार में चरचा कइलें।  आउर एह बिशेष परयास के सराहनों कइलें।

अर्जुन तिवारी जी अपना वक्तव्य में भोजपुरी समाज के सभ्यता आ संस्कृतियो पर बिस्तार से  चरचा कइलें। संगही कई गो कहाउतन का माध्यम से भोजपुरी सभ्यता आ संस्कृति आ सहभागिता पर प्रकाशो डलने आउर कहने कि वाणी में ऊ तागत बाटे जवन कुल्हि भाषवन के तागत देवेले। भोजपुरी के लोक शब्द अपना गहिराह आ गम्हिराह अरथ खाति जानल जाने। जवन भोजपुरी साहित्य में छिपल रहला का बादों देखात रहेला। ई किताबि महिला रचनाकारन का उपरि बाटे जेकरा के केंद्र में राखि के कहलें कि लोकगीत, लोक संस्कृति, आ लोक साहित्य के सुरक्षा खाति मेहरारून के जनम भइल बाटे। एकरे बीचही ओह किताबि के रचनाकारन के रचनाधर्मिता आ संपादकन के ज्ञान कौशल के परसंसा कइलें। संगवें ऊ मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र जी के जीवन प्रसंग के एगो श्लोक क जिकिर करत बेर ढेर भावुक हो गइलें। नूपुर से माता सीता के पहचाने के बात क़हत बेरा आ ओकर तुलना जयशकर प्रसाद के ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ से कइलें। एह दौरान उनुका आंखिन से लोर बहत रहे।

डॉ अर्जुन तिवारी जी एगो कुशल आलोचक हवें…. एही से ऊ किताबि के कई रचनाकारन के  रचनन पर आपन गम्हिराह टिप्पणी कइलें। आ कहलें कि साहित्य आ समाज में जहाँ कहीं जरिकों गलत लउके त ओकर बरियार ढंग से आलोचना होखे के चाही।

     

विशिष्ठ अतिथि के रूप में अपना व्याख्यान देते हुए भोजपुरी साहित्य सरिता के सम्पादक जयशंकर प्रसाद द्विवेदी कहलें कि ई पत्रिका अपने एह मंच से भोजपुरी के नवहा रचनाकारन के प्रतिभा के बढ़ावे आ बुजुर्ग लोगन के अनुभव के जोगावे खातिर एगो छोटहन प्रयास ह। भोजपुरि भाषा के सम्बंध एतना गहिराह होला कि ई मन में समा जालें। ई भोजपुरिया के लमहर परम्परा ह। एह परम्परा के बचावे खातिर हमहन के एम्मे जुड़े के पड़ी।

संगही द्विवेदी जी इहों कहलें कि जब हमनी के ई काम शुरू कइनी सन त कई बेर मन में आइल कि ई काम पूरा न हो पाई बाकिर हिम्मत हौशला आउर लगन के बल पर आज हम ई किताब के आप सबन के सामने रखले बानी, आज मन में जवन सुकून मिलत बा ओके व्यक्त न कइल जा सकत।
एह मोका पर ऊ विद्वान लोगन के कई गो किताबि भेंट कइलें।

विशिष्ट वक्ता का रूप में आइल डॉ० सुमन सिंह आपन बाति बड़ मजबूती के संगे रखनी आउर  कहनी कि एह किताबि में भोजपुरी के सक्रिय महिला रचनाकरन के खासकर कवयित्रियन के प्रमुखता के संगे लीहल गइल ह। ई किताबि दू भाग में बिया।पहिला भाग में गद्य ह आ दोसरा भाग पद्य खण्ड ह। ई किताबि शोधकर्तन खाति बहुते उपयोगी साबित होखी। संगही सुमन जी ने एह किताबि के कीनके पढे आ एह पर लिखे खाति आग्रह कइली।

धन्यवाद ज्ञापन करत हिंदी विभाग के प्रो० चंपा सिंह कुछ आरोप-प्रत्यारोप कइली, आउर कहनी  कि कवनो सभ्यता आ संस्कृति होखे ओकरे उत्पत्ति आ विकास में मनई लोगन के योगदान रहल बाटे। बाकि मनई कुल्हि  बातिन के मेहरारून पर जबरी थोप देवेलें। जवाना से मेहरारून के मनई लोगन पर आश्रित रहे के पड़े आउर आउर मेहरारू ओकरा के ढोवे खातिर मजबूर हो जाली। आउर आज ओह तरह के परम्परन के तूरत देखा रहल बानी त ई आजु के किताबि बाड़ी।

उहाँ के इहो कहनी कि आजु के समय में भोजपुरी बोले में भलही आसान होखे बाकि लिखे आ पढे में ढेर कठिन बुझाले।एह तरह के कामन के बढ़ावा देवे खाति हम रउवा लोगन के आभारी बानी।  संगही उहाँ के कार्यक्रम में आइल सभे वक्ता आ श्रोता लोगन के आभार प्रकट कइली। कार्यक्रम के सफल संचालन युवा शोधार्थी दिवाकर तिवारी खांटी भोजपुरिया अंदाज़ में बड़ी ऊर्जा के संगे कइलें। एह मोका  पर कई विभागन के प्रोफेसर आ सैकड़ो शोधार्थी आ मीडियाकर्मी उपस्थित रहलें।

 

प्रस्तुति: मनकामना शुक्ल पथिक

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  1. Great content! Super high-quality! Keep it up! 🙂

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