भोजपुरी की ‘मैना’ मैनावती देवी मौन हो गइनी

जहाँ मेढ़िये खेतवा चरि जाला

जहाँ मेढ़िये खेतवा चरि जाला

का करिहें भइया रखवाला।

जहाँ नदिये पानी पी जाई

जहाँ फेड़वे फलवा खा जाई,

जहवाँ माली गजरा पहिरे ऊ

फूल के बाग उजरि जाला।

जहाँ…

जहाँ गगन पिये बरखा पानी

धरती निगले सोना-चानी,

जहवाँ भाई-भाई झगड़े

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नई दिल्ली। भोजपुरी के अपने गायकी से  पहचान दिवावे  वाली, लोकगीतन  से सामाजिक जीवन के  उकेरे वाली लोकगायिका मैनावती देवी श्रीवास्तव के जनम  बिहार के सिवान जिले के  पचरूखी में 1 मई 1940 के भइल रहे । बाकि उ आपन करम भूमि गोरखपुर के बनवनी । उ अपने  लोकगायन के शुरूआत गोरखपुर से सन् 1974 में आकाशवाणी गोरखपुर के शुरूआत के संगे कइनी । आकाशवाणी गोरखपुर के  शुरूआत मैनावती देवी श्रीवास्तव के गीतन के संगे भइल ।  उनके गीतन  के बादे  भोजपुरी संस्कृति के  एगो  अलग पहचान मिलल । उ लोक गीतन  के संरक्षण , संवर्धन आउर प्रचार प्रसार पर ढेर काम कइनी । उ लोकपरंपरा के संस्कार गीतन के  जोड़े के काम खूब कइनी । लोकपरंपरा में भारतीय सामाजिक परिवेश में रहन-सहन, जीवन-मरण से लेके हर परिवेश के उ ढेर नीमन से अपने रचना मे उकेरले बानी । उ कवियत्री आउर लेखिका रहनी । प्रयाग संगीत समिति से संगीत प्रभाकर की डिग्री लेले रहनी । म्यूजिक कंपोजर के रूप में आकाशवाणी में काम कइनी । संगही दूरदर्शन में आपन अमूल्य योगदान देहनी । इनकर विरासत के इनकर पुत्र राकेश श्रीवास्तव आगु बढ़ा रहल बाड़ें ।

श्रीमती नैना देवी के प्रकाशित पुस्तको में 1977 में गांव के दो गीत (भोजपुरी गीत), श्री सरस्वती चालीसा, श्री श्री चित्रगुप्त चालीसा, पपिहा सेवाती (भोजपुरी गीत), पुरखन के थाती (भोजपुरी पारंपरिक गीत) आ  अप्रकाशित पुस्तकन  में कचरस (भोजपुरी गीत), याद करे तेरी मैना (इछहदी गीत), चोर के दाढ़ी में तिनका (कविता) आउर बेघरनी घर भूत के डेरा ( कहानी ) जइसन अनमोल रचना समाज के दीहनी। सन् 1974 से लोकगायन के शुरूआत करे वाली मैनावती देवी के पहिला सम्मान सन् 1981 में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के 94 वें जन्मदिवस के अवसर पर बिहार में “भोजपुरी लोक साधिका” के  सम्मान मिलल  । ओकरे  बाद सन् 1994 में अखिल भारतीय भोजपुरी परिषद लखनऊ द्वारा “भोजपुरी शिरोमणि” के सम्मान ठुमरी गायिका गिरजा देवी के हाथों प्राप्त भइल । ओकरे  बाद उनुके अनेकों सम्मान मिलल जइसे भोजपुरी रत्न सम्मान, 2001 में भोजपूरी भूषण सम्मान , 2005 में नवरत्न सम्मान, 2006 में 2012 में लोकनायक भिखारी ठाकुर सम्मान, लाइफ टाइम एचिवमेन्ट अवार्ड आ गोरखपुर गौरव जइसन सम्मान से नवाजल गइल । उनुका कवनों  राजकीय सम्मान नाही मिलल  तबो भोजपुरी के सेवा में रात दिन अंतिम सांस तक लगल रहनी । अइसन  महान भोजपुरी सेवी के शत शत नमन बा ।

  • लाल बिहारी लाल

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