भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि

हरि हरि छहरि-छहरि बरिसे पनिया

भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि॥

 

घेरि-घेरि आवे बदरिया रामा

ओढ़ि-ओढ़ि करिया चदरिया रामा

अरे रामा दादुर सुनावे कहनिया

भिजेलीं राधा रनिया,ए हरि॥

 

रहि रहि झींगुर झाल बजावे रामा

सनकिरवा से ताल मिलावे रामा

अरे रामा घूँघट में बाटे चननिया

भिजेलीं राधा रनिया, ए हरि॥

 

साँझे फतिंगना गीतिया गावे रामा

दीयरी तर नाच दिखावे रामा

अरे रामा बनिहें बघरिया दुलनिया

भिजेलीं राधा रनिया,ए हरि॥

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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