भउजी के पुजारी

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी

घर में रही के कइसे जिनगी गुजारी भाई जी,

उनके खाता में भइया के आवे कुल्ही कमाई,

बिन दावा के बिलखत बाड़ी घर में बुढ़िया माई,

दीहली स्वर्ग जइसन घर के उजारी भाई जी,

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी,

दाना दवाई कइले बाड़ी रूचत नइखे खाना,

तोर-मोर करी लडत बाड़ी माई से रोजाना,

दुखवा मिलत बाटे कतना हम उचारी भाई जी,

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी,

बाबूजी के हुक से उनके जान गइल अखडेरे,

सोंच के उनकर बात आंख पर काली बदरी घेरे,

आपन लोग हीं बनल जाता बेबीचारी भाई जी,

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी,

पांडेय आनंद बनल मतलबी बेदर्दी ई जमाना,

जेकरा के तू आपन कहब उहे मारी ताना,

सुख के आस ना कर दुख के बही नारी भाई जी,

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी,

 

आनन्द कुमार पाण्डेय

महाधन पुर ,बलिया

उत्तर प्रदेश

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