बिना बात के

तनि हई देखा

फलाने ढेकाने के

अंगुरी पकड़ि के चले सिखावतारें

अरे! आजु ढेकाने त

फलाने के नरेटी दबावतारें

आ चीने लेंज के नियम बतावतारें

जवना से जामल ओकरे बिरोध

समय का फेरा

अबले कराची में तिरंगा लहरावत रहलें

ई सुनत सुनत कान पाक गइल

बाकि पी ओ के ना भेंटाइल

एहर कुछ लोग बीजिंग पर नजर गड़वले बा

बाकि का कहीं

कोरोनवा मंच कब्जियवले बा।

 

ई कतो पढ़े के ना मिलल

एगो अमीर बाभन रहलें

तबो बाभने शोषक कहालें

भर भर के गरियावल जालें

अइसने कुछ कइके

ढेर लोग नेता बनि गइल।

 

इहाँ देखा-देखि के खेला बा

जबरी के झमेला बा

कुछ लोग पाक आर्मी चीफ

आ कुछ लोग बीजिंग के

परधान बनल चाहता

मुंगेरी लाल के हसीन सपना देख रहल बा

आगहूँ  देखते रही।

 

बात अतने भर रहित

तबों ठीके रहित

एगो नया खेला चालू बा

समाज आ सत्ता के गरियावल

अइसना के विमर्श बतावल

कुछ लोग ठीकेदार बतावता

मरजाद के बाति

धत्त बुड्बक

गंवारन के बाति होला

मउगी मउगी के अदला-बदली

मउज मस्ती

अरे ना

सभ्यता आ बड़प्पन के बाति कहाता।

 

ऊंच पीढ़ा भुलाइयो के

जनि देही केकरो

इहों एगो विमर्श बनि जाई

ओह पीढ़वा पर बइठे वाला

दमाद बने के दावा ठोकी

जे ओकरा के रउरा भीरी लियायल होई

उहे रउरा से सबूत माँगी

झूठ आ साँच के

रउरा माथा पीटत रहीं

बिना बात के॥

 

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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