बागी बलिया

गंगा सरयू टोंस के संगम जहवा होला
भृगु क्षेत्र ह बलिया दादा
लोग रहेले भोला
जहां के भृगु बाबा सुनs
विष्णु से लड़ गईले
अंग्रेजन के गुरुर के डाउन मंगल कइले।
ओह धरती में ऊर्जा बाटे
मुर्दा भी मुस्काला
चितु के गर्जन सुन के
अंग्रेज कइले हल्ला
 
बागी बलिया ह ओकर
अगस्त क्रांति के अगुआ
आज़ादी के खातिर ओइजा
मुअले बहुते बबुआ
हिंदी के हस्ताक्षर भइले
हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
केकर अइसन हिम्मत होइ
के लक्ष्य के भेदी
परशुराम चतुर्वेदी के संत परंपरा
भइल जहवा जारी
जे भी आपन जोर दिखाई
उ बलिया से हारी
जयप्रकाश नारायण जेपी के जर्रा जर्रा जाने
थर थर्रा गइली इंदिरा के ना उनके माने
अमर कांत के अमर कहानी सगरो हिले डोले
शिक्षा के शिखर पर चढ़ के
जय भारत के बोले
चंद्रशेखर जी पी एम रहनी
पावर ढंग देखवनी
भारतीय राजनीति के पुरोधा
पावन भावन कहनी
 
प्रणाम धरती प्रणाम लोग के
प्रणाम जहां में बावे
बिरहा गीत संगीत में बलिया
कई राग सुनावे
सुरहा जहां बहुत अघाला
बाढ़ के पानी पिये
जहवा सुनी चिरई चुरउँग
मछरी जीवन जिये
ओह माटी में माटी में
प्यार भरल बा
आदमी ना उतराला
पौरुष उनकर देख के
दुश्मन भी पराला।।
-पथिक

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