पुजारी जी के तोता

एगो रहन पुजारी जी. ऊ एगो सुग्गा पोसले रहन. रोज़ नियम से कथा-प्रवचन सुने जात रहन एगो महात्मा जी के कुटिया में. सुगवा रोज़ सोचे कि हमार मलिकवा रोज कहाँ जात बा भाई. एक दिन टोक देलस. पुछलस कि रोज़-रोज़ कहाँ जाइला रउआ नहा-धोआ के? पुजारी जी बतवलन कि एगो बहुते सिद्ध महात्मा जी बानी, उहाँ के जीव के मुक्ति के उपाय बताइला, हम उहाँ के प्रवचन सुने जाइला. सुगवा कहलस कि तनी हमरो बारे में पूछब ना कि हमरा एह बंदी जीवन से कब मुक्ति मिली? पुजारी जी कहलन कि ठीक बा, आज पूछ लेब.
पुजारी जी महात्मा जी से पुछलन कि महाराज हमरा सुगा के सवाल बा कि ऊ कैसे मुक्त होइ एह पिंजरा से? अतना सुनते महात्मा जी के चक्कर आ गइल आ मुहकुड़िये औंधा गइलन. थोरिका देर बाद होश आइल त पुजारी जी पुछलन कि का हो गइल ह महाराज? महात्मा जी कहलन कि कुछो ना, तोहरा सुगा के मुक्ति के उपाय हम काल्ह बताइब! घरे गइलन तब सुगा पुछलस कि पूछनी हं हमरा मुक्ति के उपाय? पुजारी जी उत्तर देलन कि भाक बकलोल! तोर सवाल तुनते महाराज जी के घुमरी आ गइल ह आ गिर के पटुआ गइलहन! काल्ह बतइहें उपाय. सुगा कहलस कि ठीक बा, समझ गइनी हम!
अगिला दिन जब पुजारी जी प्रवचन सुने चललन तले उनका के जात देख के सुगवे घुमरिया के पिंजरा में मुअला नियन पटुआ गइल! पुजारी जी के बुझाइल कि मू गइल का त ! धौर के पिंजरा खोल के बहरी निकललन त लागल कि हुटुकी चलता. ओकरा के पानी पियावे खातिर पानी लेबे गइलन तले सुगा फुर्र से उड़ गइल. अब पुजारी जी खिसिन बुत्त!
आज महात्मा जी किहाँ गइलन तब महतमे जी पुछलन कि का हाल बा तोहरा तोता राम के? पुजारी कहलन कि महाराज ! पूछी मत बड़ी नमकहरामी निकल सुगा! उड़ गई बदमाश. अतना बात सुन के महात्मा जी ठठा के हँसलन आ कहलन कि तोहरा सुगा के मुक्ति मिल गइल, ऊ असली भगत रल ह ! तोहरा से ज्यादा समझदार बा ऊ. तूं रोज़ कथा-प्रवचन सुने ल, बाकिर ओकर मरम ना जाने ल. सुगा कथा के मरम एके बेर में समुझ गइल आ अपना बंदी जीवन से मुक्ति पा गइल. कथा-प्रवचन सुनला के ना ओकर मरम समुझला के मोल ह!
समुझीं अपना मन में…!
संकलन
डॉ शंकर मुनि राय
साभार :- फेसबुक

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