नेता जी के भाषण

शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
केहू के नेता जी लगतानि जीजा,
केहू नेता जी के सार हो गईल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
नेता जी दे तानी ई भाषण –
हमार होखे दी एक बार शाषण,
हरदम चलत रही लात- जूता
सुनब की सदन में मार हो गइल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
हम जितब गरीबी मिटाएब
हमहू लुटेब ,रउरो से लुटवाएब
जिअत बच गइनी तब रउवा देखब
की सबसे आगे बिहार हो गइलबा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
मौका दी मत सोची – डेराई
करनी पीछे के हमार भुलाई
अबकी परिवर्तन आइसन कराएब
सुनब सभे बेकार हो गइल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
संकट बिजली, पानी के ओराई
शिक्षा, हॉस्पिटल आइसन हो जाई
डॉक्टर साहब छमाही भेटाइब
शिक्षक सभे फारार हो गइल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
सुनले होखब भइल रहे हल्ला
हम करीले हरदम घोटाला
बिगड़ल आदत बा बच्चपन से आइसन
अबत बहुत सुधार हो गइल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
जनता के नइखे भरोसा
ढेर दिन सहल गइल धोखा
केहू बहकवला में ना आयी
अब सभे हुशिआर हो गइल बा
शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन,
चारु ओर गुलजार हो गइल बा ।
– प्रतिज्ञा दीक्षित
 

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One Thought to “नेता जी के भाषण

  1. सुरेश कांटक

    एगो भोजपुरी कविता
    ————————–
    बिछावे जाल मछेरा रे
    सभके छीने बसेरा रे

    कहे हम भाग्य विधाता ह ईं
    सभ के जीवन दाता ह ईं
    सरग में सभका के पहुँचाइब
    हमहीं भारत माता ह ईं
    बढ़ावे रोज अंधेरा रे

    चकमक चकमक सगरो करे
    जोति नयन के चुपके हरे
    देखावे सपना रोज नया ई
    पेट सँघतियन के ई भरे
    भगावे दूर सबेरा रे

    कैद में सुरुज अउरी चान
    करे के बा ओकर अभियान
    बजावे ढोल ढमाका खूब
    नाप देलस धरती असमान
    उगावे खूब लमेरा रे

    करीं का कांटक सोचे रोज
    करेलन हथियारन के खोज
    बाँची मीन के क इसे जान
    मने ना निरद इयन के भोज
    लगावे सगरो फेरा रे

    * * *
    — सुरेश कांटक
    कांट, ब्रह्मपुर, बक्सर, बिहार , 802112

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