नव गति, नव लय, ताल-छंद नव

भोजपुरिया संस्कृति में जतरा पर निकलत बेरा, कवनो नया काम शुरू करत बेरा चाहे कवनो शुभ काज के बेरा, दुआर, अंगना आ सतीमाई के अथाने चउका पुरल जाला। कोरोना के विश्व-व्यापी महामारी के विषाद-काल में हृदय के हरषावत ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के जनवरी-फरवरी 2021 के एह संयुक्तांक के आवरण ओही चउक पुरला के आकृति बा। हरदी के रंग के शुभ-संदेश हर भोजपुरिया क्षेत्र के लोग जानेला आ आदर करेला। ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के प्रस्तुत अंक के आवरण भोजपुरिया चित्रकारी पर बा। भोजपुरी भाषा आ साहित्य जइसन भोजपुरी कला आ चित्रकला के समृद्धि समय के साथे आजु ढेर हो रहल बा। साहित्य खातिर रोज कुछ ना कुछ नया आ अनुकरणीय होत बा। अब लेखकगण खातिर प्रकाशको  उपलब्ध बाड़े आ अवसरो उपलब्ध बा। तीसन बरीस पहिले लिखल किताबन के प्रकाशित होखे के अवसर मिलत बा। श्री मार्कण्डेय शारदेय जी के ‘दीपशलभ’ प्रबंध-काव्य उदाहरण बा। 1977 में छपल आचार्य कवित पं. धरीक्षण मिश्र के पहिलकी किताब ‘शिव जी के खेती’ के बेयालिस-लैतालिस बरीस बाद पुनर्प्रकाशन एह के उदाहरण बा। कला के दिसाईं देखल जाव त सर्जना के संजीव सिन्हा से लगाइत अनिता पाण्डेय, कौशलेश पाण्डेय, डाॅ. कुमुद सिंह आ एह अंक के आवरण चित्रकार वंदना श्रीवास्तव जइसन ढेर लोग भोजपुरी चित्रकला के बढ़ंती में जुमल बा। पहिले ‘सर्व भाषा ट्रस्ट’ पर आ एह घरी ‘भोजपुरी: द सोल ऑफ़ मिलिनीयर्स’ पर आयोजित ऑनलाइन चित्र प्रर्दशनी नया साल में नया आस के पोढ़ करेवाला बा। गायन के वर्तमान आ नवका पीढ़ी में डाॅ. नीतू कुमारी नूतन, भोजपुरी के मैना मैनावती देवी ‘मैना’ जी के सुपुत्र श्री राकेश श्रीवास्तव जी जहाँ अपना टीम के साथे परंपरागत गीतन पर कार्यशाला आयोजित क के समृद्धि प्रदान करत बानी, उहवें चंदन तिवारी आ मनीषा श्रीवास्तव अपना राग-अनुराग से, नयकी पौध सिसोदिया सिस्टर्स (श्रद्धा-समृद्धि), प्रियंका पाण्डेय, अखिलेश विश्वकर्मा, ई लोग अपना लगन से भोजपुरी के लोकप्रियता देत बा लोग। एने लखनउओ से भोजपुरी आ अवधी के दुलारी संजोली पाण्डेय अपना ढंग से लोकगायन के समृद्ध करे में डुबल लउके ली। ओही कतार में लुकाइले-भुलाइल सही, बनारस के माला के अनगढ़ो खनक कान में रस घोरत रहेला। एतने ना, आदर्श आदी के मधु-मिसरी वाली भोजपुरी पल-पल में माटी के रंग बिखेरेला त दूर देस अमेरिका से स्वस्ति पाण्डेय जी के प्रस्तुति होखे चाहे सूरीनाम के निवासी आ एम्स्टर्डम के रहनिहार राजमोहन जी के गायन के सथवे अनेक संस्था-समीति अपना ढंग से भोजपुरी गायन के प्रतिष्ठा बढ़ावत बा। ‘आखर’ के एह साल के वर्चुअल महोत्सव ओही प्रेरणा के प्रमाण रहल। ‘लोक संस्कृति शोध संस्थान’ आ ‘अन्तरराष्ट्रीय भोजपुरी न्यास’ के उद्यम ओही सम्मानित श्रेणी में बा।
कोरोना के प्रभाव से सबसे प्रभावित कलाकार लोग बा। मंच-रंगमंच आ सिनेमा से जुड़ल कलाकार लोक एह विकट काल के सबसे जोर से मार खइले बा, ओह स्थिति में ऑनलाइन कार्यक्रम के भले बाढ़ आइल होखे बाकिर ओह लोग के पाकेट में सुखारे बा। एह प्रतिकुल काल में काल के कवनो अंतरा-कोना में दँपाइल कलाकार श्री रामचंद्र माँझी जी के पद्मश्री सम्मान मिलल सौभाग्य के साथे उत्साह बढ़ावे वाला बा। उत्साह बढ़ला के बात पर जब ध्यान ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के एह अंक पर जा ता तऽ मन तनी अउरी हरिहर हो जात बा। संपादन मंडल के कबो पत्रिका के अंकन खातिर गद्य लेख के बाट निहारे के पड़े बाकिर एह अंक में गद्य के अधिकता गर्व आ उमेद बढ़ावे वाला बा।
धरोहर में पं. धरीक्षण मिश्र जी के ‘चुनाव के चार चरण’ आपन परिचय बखूबी देत बा। ‘भोजपुरी कथा साहित्य में उपन्यास के स्थान’ (डा. ओमप्रकाश सिंह ‘राजापुरी’) आ ‘भोजपुरी के कथेतर गद्य’ (डा. बलभद्र) जइसन शोधपरक लेख से ले के डा. हरेराम त्रिपाठी ‘चेतन’ जी के कहानी ‘इयाद के टूटल चौहदी’, कनक किशोर जी के ‘सुगिया गिरी मुरझाय’, बंदना श्रीवस्तव जी के ‘सोमरिया’, पद्मा मिश्रा जी के ‘गाँव के बेटी’ आदि के सथवे पाँच गो किताबन पर चर्चा आ समीक्षा, सुभाष पाण्डेय, अशोक मिश्र, देवेन्द्र कुमार राय, डा. हरेश्वर राय, डा. सुनील कुमार पाठकश्रेष्ठ कविगण के कविता के सथवे नवांकुरो लोग के रचना आ स्थाई स्तंभन से पत्रिका नया साल में प्रवेश कइले बिआ। सर्जक सभे के सहयोग आ साथ बनल रहे। अउरियो पत्रिकन के सथवे ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ डेगे-डेगे बढ़त अपना कूबत भर भाषा आ साहित्य खातिर आपन योगदान देते रहीं। ‘नव गति, नव लय, ताल-छंद नव’ के आशा-उमेद के

 

सथवे नया साल के शुभकामना आ सबके प्रणाम।
राउर
केशव मोहन पाण्डेय

Related posts

Leave a Comment