जोर-शोर से उठल भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के मांग

नई दिल्‍ली: भोजपुरी के संविधान के  आठवीं अनुसूची में शामिल करे  के  मांग एक बेर फेर  बहुत जोर-शोर से उठावाल  गइल। अवसर रहल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विश्व भोजपुरी सम्मेलन आ भोजपुरी समाज दिल्‍ली के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्‍ट्रीय मातृ भाषा दिवस के अवसर पर आयोजित ‘भोजपुरी हमार माँ – मनन, मंथन और मंतव्‍य’ विषयक विचार गोष्‍ठी के । मुख्य अतिथि श्री हरिवंश, उपसभापति राज्यसभा रहने । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आ  राज्यसभा के उप सभापति श्री हरिवंश ने कहने  कि भोजपुरियन  में बहुत ऊर्जा बाटे। ओह ऊर्जा के सदुपयोग होखे के चाही। भोजपुरी के  मान्यता मिले के चाही । ओहमे नीमन साहित्य के रचना होखे के चाही।

श्री राम बहादुर राय ने कहने  कि जे भोजपुरी के  विरोध कर रहल बा , उ लोग  के आपुस में पहले दो-चार दस दिन ले तार्किक चर्चा कर लेवे चाही। भोजपुरी भाषियन  के  अधिकार बा  कि ओकरा के  मान्यता मिले। उ आगे कहने  कि भोजपुरी के  मान्यता से हिंदी के  बल मिली। श्री ओंकारेश्वर पाण्डेय ने कहने  कि  भोजपुरी काहें , कुल्हि छोटी भाषन के  मान्यता मिले ताकि चाही, तबे  उचित  विकास होखी। अतिथि लोगन द्वारा एह अवसर पर विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आ  भोजपुरी समाज दिल्‍ली के अध्‍यक्ष अजीत दुबे के लिखल पुस्‍तक ‘तलाश भोजपुरी भाषायी अस्मिता की’ के संशोधित संस्‍करण के विमोचन कइल गइल।

ओह कार्यक्रम में अनेक लोगन  के  सम्मानित कइल गइल । सम्मान के क्रम में पिछले दशक में आउटस्टेंडिंग परफॉर्मेंस करे खाति लोक-गायिका श्रीमती विजया भारती के  ‘भिखारी ठाकुर सम्मान’ से सम्मानित कइल गइल। ओकरे बाद  मातृभाषा के संरक्षन आ बढ़न्ति में लागल तीन पत्रिकन  के संपादकन  को सम्मानित कइल गइल । ‘पाती’ खातिर डॉ. अशोक द्विवेदी, ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के खातिर  श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी आ  अपने आप में अद्भुत कार्य करे वाली पत्रिका ‘सर्व भाषा’ के खाति केशव मोहन पाण्डेय के  सम्मानित कइल गइल ।

 

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