चुनाव परधानी

सभे लड़ता चुनाव परधानी ए रानी भोट केकरा के दीहीं ।
खल खल के बडुए निसानी ए रानी भोट केकरा के दीहीं ।।
बाबुजी के चिह्न बाटे चटकन चुनाव में
चाचाजी के लउकत बा चूरी परभाव में
भउजी करेली पहलवानी ए रानी भोट केकरा के दीहीं ।।
गाँव के विकास बाटे अहरी से खेत में
रूपेया सरकारी ओरा गइल रेत में
लंगट के लार बढ़ियानी ए रानी भोट केकरा के दीहीं ।।
अरजी बा रउआ से सुन लीं सजनवा
रउओ बनाईं अब आपन असथानावा
लड़ लीं चुनाव परधानी ए राजा भोट अपने के दीहीं ।।
बाबुजी के बिगहा रगर दीं चुनाव में
जेवर जेवरात से ना फयदा लगाव में
मनईन के जाईं गोड़ छानीं ए राजा भोट अपने के दीहीं ।।
~ कन्हैया प्रसाद रसिक ~

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