चुनउवा

सोझवें ओकतिया बतावेला चुनउवा
नीमन-बाउर खेल खेलवावेला चुनउवा॥


कटिया करवावे,खेते खेत घुमावेला

लहनी सरिआई के बोझ बनवावेला

गउवाँ में चकरी पिसवावेला चुनउवा॥

 

तारु आ तरवा, दूनों पिराये लागल

मन के उछाह, घामे थिराये लागल

सबही से छिपनी धोवावेला चुनउवा॥

 

मुंहवाँ सुखाइल बाटे, ओठवा झुराइल

कई घरी बीतल, पनियों ना भेंटाइल

दिनही में चनरमा देखावेला चुनउवा॥

 

हाथ ज़ोरवावेला गोड़ धरवावेला

टुटही मड़इया आ दुवरा देखावेला

तिनगी वाला नाच नचवावेला चुनउवा॥

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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