चार यार

चार गो यार रहे लो, रामु, कालु, बिकेश, शेरु। सब लोग आपन आपन बात हकले रहे लो..।
रामु कहलन,”ए यार हमरा भीरी गाड़ी बा, घर बा, दुआर बा, तहरा लोग के लगे का बा”।
अब कालु कहलन, ” ए यार लोगन, हमरा लगे खुब रुपया बा, पइसा बा,तहरा लगे का बा”।
अब बिकेश के बारी रहे, उ कहलन, “ए यार सुन सन , हमरा लगे पढ़ाई बा,ज्ञान बा, हम कुछउ कर सकीला, तहरा लगे का बा”।
अब लास्ट में शेरु के बारी रहे। शेरु आपन शर्ट के बटन खोललन, तब शेरु कहलन, ” हा हा हा हा….ए भाई लोग सुन ल लो, हमरा लगे माई बिया, बाबुजी बाड़न, हमरा लगे हई जेतना लउकत बा सब खेत हमार बा, हमरा लगे गाय बिया, हमरा लगे भैस बिया और सबसे बड़हन बात कि हमरा लगे 56 इंच के सीना बा, हई देख ल सन, जब चाहेम तब हम दुश्मन के धुल चटा देहब”।

“संजीव कुमार रंजन”
राजेन्द्र नगर, गोपालगंज (बिहार)।

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