मटिया क गांव

पीपर पकरिया के गछनार छाँव हो,
ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।
मुर्ग़ा के बोलिया पर जहवाँ बिहान बाय,
मनवा रिझावै बदे बिरहा के तान बाय।
दिन रात चलत थकत नाही पाँव हो,
ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।।
देहियाँ क जहवाँ सिंगार बाटै माटी,
जोगवल जात बा पुरान परिपाटी।
कगवा क बोलिया सगुन काँव काँव हो,
ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।।
कबहुँ सुखात ना पसीनवा क सोती,
खेतवा कियरिया से काढ़ि लेत मोती।
कबौं बिधि दहिने कबहुँ जात बाँव हो,
ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।।
धुरिया में लोटी के हँसैले लरिकाईं,
चूमि चूमि मुँहवा दुलार करै माई।
बावला गँवार जन गंवही में ठाँव हो,
ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।।
  • राम जियावान दास ‘बावला’

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