ए माई हम ससुरा ना जाइब

ए माई हम ससुरा ना जाइब

ननदी नटिन देवरा दरिंदा

भसुरा भेड़ुआ करेला खाली निंदा

छछबेहर गोतिनिया के बात हम बताइब

ए माई हम…………………….

 

ससुई सनकी ससुरा कमीना

मुसकिल करेलेसं हमार जीना

कहेलेसं दहेज़ लेके आउ

ना त जहर देब चाहे जलाइब

ए माई हम………………………

 

मरदा मुअना रहेला हमसे हट के

हरदम मारे कुकुर जस झपटि के

अचके फफेंली धके कहेला दबाईब

ए माई हम………………………..

 

कबो ना हटिला दिन भर खटेला

तबो ओहनी के काहे अटकिला

भोजन के बतिया कइसे भुलाइब

ए माई हम………………………..

 

माई रे रहे दे हमरा के एहिजे

पापी मत बन ससुररिया भेजी के

रूखल सुखल जवन देबे चबाइब

ए माई हम………………………..।।

 

रचना:-विमल कुमार

ग्राम +पोस्ट:-जमुआँव

थाना:-पीरो,भोजपुर,बिहार

 

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