गीत

कर जोरि बिनवे दुलारी बेटी,
बाबू जनि काटीं हरिअर गाछि पलंगिया का कारन जी।

आम, महुआ, पाकर, गुलर, बर जी,
बाबा निमिया, निबुइया, जमुनिया धरतिया के छाजन जी।

मथवा क अँचरा सरकत खने जी,
डलिहें सुरुजमल कुदीठि त माई सकुचाई जइहें जी।

सजना अँगनवाँ दुरूह काज हो,
धिया, दिनभर खटि-मरि थकबू त रयनि का नींनि लेबू हो?

कहवाँ सुतइबू गोदिलवा नू हो,
धिया, कहवाँ सुतइबू सजन केरि चरन दबइबू नू हो।

कीनि दीं बाबू हँसुअवा नू जी,
बाबू, घने-बने खरई कटाइबि, तरई बनाइबि जी।

लीपि-पोति घरवा अँगनवाँ क जी,
बाबू, धरती प तरई बिछाइबि, सेजिया डँसाइबि जी।

नइहर माई गोदी सुतनीं जी,
बाबू, ससुर-नगर माता धरती क गोदिया लुकाइबि जी।

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