कुछ मुक्तक

गुलाब के खुशबू के तरे रसल बा केहु

, नेह नहाइल नयनन मे बसल बा केहु,

दिल के धड़कन धड़क ई कहत बा –

हमके याद कर के दूर हंसल बा केहु।

 

हमार दिल के दरवाजा खटखटावल केहु,

हमार फोटो आज सिना से सटावल केहु,

हमार प्यार ह पूजा पावन गंगा पानी जस

बिना मिलले हमे प्रेम रस में पटावल केहु।

 

अब आँखिन उनकर राह निहारत बानी,

दिल के दुआर उनका बदे बहारत बानी,

बार बार सिना से सरकत बा ओढ़नी

केहु उनका सिवा देखे ना सम्हारत बानी।

 

  • अभिषेक भोजपुरिया

Related posts

Leave a Comment