अंजुरी भर अंजोर

ए चान अंजोर कई द

उग के रात,भोर कई द।

 

लरकोरि के लरिका रोवे

टुकुर टुकुर सरग निरेखे

माई गावे मीठी लोरी

तबो ना उ सोवे

चांदनी से बिभोर कई द

ए चान अंजोर कई द।।

 

दिन में काहे छिप जाल

बोल केकरा से डेराल

रात में आके तनि के

करे ल तारन प राज

आजु काहे बाड़ लुकाईल

कबेसे दे तानी आवाज।

 

तनिका तु धेआन देई द

दूर आँख से लोर कई द

उग के रात,भोर कई द

ए चान अंजोर कई द।।

 

परेम आपन खुब बरिसावे ल

सभ लईकन के खुब भावे ल

सभ लईकवे कहेलन मामा

आवे में समय घिंचेल लामा।

 

झटपट दउरि आजा तु

तारन के मन तोर कई द

सरग में तु शोर कई द

खुशी से सराबोर कई द

उग के रात,भोर कई द

ए चान अंजोर कई द।।

 

बबुआ खुशी से झुमे लागो

अंजुरी भर भिख अंजोर देई द।।

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रचना-विमल कुमार

ग्राम +पोस्ट-जमुआँव

थाना-पीरो,जिला-भोजपुर (बिहार)

मो नं- 8340507606

 

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