ए… बालम!

फूल झरै
तोहरे बोलियाँ
ए…बालम ।

तब तौ कहेय
हम कुंईयाँ न खोदबैय
अब काँहे पनिया
भरायेव…
ए…बालम ।

तब तौ कहेय
हम खेती न करबैय
अब काँहे कटनी
कटवायेव…
ए…बालम ।

तब तौ कहेव
हम सेजिया न सोईबैय
अब काँहे कुण्डी
लगायेव…
ए…बालम ।

– श्लेष अलंकार

Related posts

Leave a Comment