ई हौ हमार बनारस

इतिहास अउर अध्यात्म क अगर बात करल जाय त काशी के भारत क सबसे पुराना नगर कहल जाला | काशी ऊ नगरी हौ जहाँ भारतीय संस्कृति अउर संस्कार क फुलवारी अबही तक लहलहात हौ जबकि भारत में हर जगह ही पश्चिम के देशवन क असर खूब चऊचक देखात हौ | गंगा नदी के किनारे बसल काशी क विस्तार काशी के पवित्रता क कहानी कहला | न खाली हिंदुस्तान बल्कि विश्व के कोने कोने से लोग इहाँ घूमअ,पढ़अ,लिखअ आवलेन और इहाँ कुछ दिन रहअ के बाद एहि शहर के रंग में रंग जालेन | घाट पर देखबअ त विदेशी लोगन भी अपने अपने देश क पहनावा छोड़ के कुरता-धोती पहिन के,माथे पर टीका लगा के अउर गले में रुद्राक्ष क माला लटकाके घाट पर टहरत देखा जइहन | बाबा विश्वनाथ के शरण में आये के बाद त बड़ा बड़ा धुरंधर आदमी भी ढीला पड़के मंदिर में भजन गावत मिल जईहन | इहाँ के भूगोल क बात करी त ,काशी खूब बदलल,आजतक बदलतअ हौ लेकिन सामाजिक अउर सांस्कृतिक ढाँचा कभो बदलल नाही | पचकोशी के अंदर जेतना गाँव-शहर क हिस्सा आवेला ओही के मुख्य रूप से काशी कहलेन ,बाद में धीरे-धीरे भौगोलिक विस्तार,राजनैतिक अउर सामाजिक प्रभाव में आके काशी क एक नाम बनारस भी हो गइल | लोग कहलेन कि बनारस नाम भी इहाँ के एक राजा के नाम पर पड़ल हौ | आधुनिक नाम वाराणसी वरुणा अउर अस्सी नदी क नाम पर पड़ल हौ |वइसे अब अस्सी नदी सिकुड़ के नाला बन गईल बा , हाँ बाकी वरुणा नदी में चार-पाँच महीना तक पानी अबहिओं देखा जाला | चाहे जहाँ क उठा के देखा त मिली कि विश्व में संस्कृति नदीअन के किनारे ही विकसित भयल हौ, ई कारन से भी बनारस महत्वपूर्ण हो जाला ,काहे कि इहाँ गंगा नदी में पानी हरदम भरल रहेला | एक बात बनारस के बारे में बहुत प्रचलित बा कि भले हर जगह गंगा जी किनारा छोड़ के चल जायं लेकिन बनारस में दशाश्वमेध घाट छोड़ के गंगाजी कभो नाही जईतिन | दशाश्वमेध घाट ऊ घाट हौ जहाँ से रास्ता बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाला | मतलब साफ बा कि बाबा विश्वनाथ जी के कृपा से बनारस में हरियाली बनल रहेला ,पानी क कभो कमी भी नाही होत ,आगे का होइ ई त नाही मालूम बा पर अबही तक बनारस में कउनो बड़ा प्राकृतिक विपदा नाही आयल हौ जो बाबा विश्वनाथ जी के कृपा से ही संभव हौ, ओनकर आशीर्वाद बनारस के लोगन पर बराबर बनल रहेला | अध्यात्म अउर भक्ति के कारन बनारस सबके आकर्षित करेला मगर खाली इहै नाही बल्कि इहाँ अउर भी बहुत कुछ हौ जेके खातिर लोग बनारस क नाम ले लेन | बनारस के हर चीज में मिठास घुलल मिली ,केतना लोग त बनारसी लोगन क बोली सुन के ही मस्त हो जालेने | बनारसी साड़ी ,बनारसी पान ,लंगड़ा आम विश्व स्तर पर प्रसिद्ध बा | बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी क त बातअ कुछ अउर बा,एकरे टक्कर क यूनिवर्सिटी ढूढ़ले न मिली | लोग कहलेन कि बनारस में संकट मोचन हनुमान और कालभैरव जी क दर्शन करके त बड़ा बड़ा खतरा टल जाला | नौ देवी क मंदिर बनारस क एक अउर विशेषता बा,महामृत्युंजय मंदिर ,मार्कण्डेय महादेव,तिलभांडेश्वर महादेव,मानसमंदिर ,बीएचयू प्राँगण में स्थित विश्वनाथ मंदिर भक्ति और अध्यात्म में आस्था रखअ वालन के बहुत सुखद महसूस करावेला | चाहे केतना भी अधार्मिक प्रवृत्ति क लोग रहअ ,बनारस के इन मंदिरों में प्रवेश करतअ भगवान क भजन करअ लगेला |सावन के महीने में मानस मंदिर में लगअ वाला मेला भी देखअ वाली चीज़ बा ,गज़ब क भीड़ होला | घूमअ-टहरअ वाले अलग आनंद और पूजा-पाठ वाले आनंद आनंद ढूढ़त देखा जालेन | मंदिर क बात होत हौ त बताना जरुरी बा बनारस में हर गली-गली में मंदिर बा , कोई केतनो परेशानी में हो इहाँ आके बहुत शांति मिलला | एही खातिर लोग इहाँ भाग-भाग के आवेलेने | लोग त इहाँ तक कहलेन कि बनारस में मरी त बढ़िया होये ,काहे से इहाँ मरे पर डाईरेक्ट स्वर्ग मिली | स्वर्ग के पीछे का धारणा हौ ई बात इतिहासकार और विद्वान लोग बता सकलेन पर एक बात जो हमरे दिमाग में आवला ऊ ई कि बनारस में रहेके बाद आदमी क मन क स्थिति बदल जाला ,भक्ति के रंग में अगर रंग गईल त वइसे ही वोकरे दिमाग और दिल में कउनो बात ,कउनो चाह नाही रहत अउर जब मरत समय कउनों चाह नाही रहत त आदमी के मोक्ष न मिली त का मिली | आज के ज़माने में दुनिया में हर आदमी क बहुत ख्वाहिश हो ,अइसे में जिंदगी भर क बात छोड़ द ,उ मरत समय भी चैन से नाही मरत | भक्ति अउर आध्यात्म में आदमी मन के शांत रखअ जान जाला | ऊ समझ जाला कि जीवन में जरुरत भर क आराम से मिल जाला ,बाकी मन के बढ़ाये से ,तनाव बढ़ला अउर फिर जीवन संघर्ष में आ जाला | जे कोई भी बनारस के बारे में जानेला वो के पता होइ कि इहाँ कउनो बड़ा उद्योग-धंधा नाही हौ ,लेकिन फिर भी इहाँ क अपने कमाई से संतुष्ट रहलेन और मस्त रहलेन | जीवन कइसे जियल जाला ई एक सच्चा बनारसी से बेहतर कोई नाही बता सकत | दुनिया के अलग-अलग जगह से लोग इहाँ आके पढाई करलेन कि आखिर बनारस में संस्कृति में आखिर कउन बात हौ जे इहाँ आये के बाद एके भूल नाही पईतेन | बनारस के संस्कृति क थोड़ा अउर बात करल जाये त सारनाथ एही हौ ,जो बुद्ध धर्म क बहुत बड़ा धर्मस्थल हौ | संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में देश-विदेश क लोग संस्कृत,वेद ,उपनिषद,ज्योतिष क अध्ययन करअ खातिर आवलेन | रामानंद जी बनारस क ,कबीर दास जी बनारस क ,तुलसीदास जी भी बहुत दिन बनारस में रहलेन,रामचंद्र शुक्ल ,प्रेमचंद,श्यामसुंदर दास,जयशंकर प्रसाद सरीखे महान साहित्यकार भी इसी बनारस की मिट्टी में पले-बढे | बिस्मिला खान शहनाई वादक,रविशंकर,गिरिजा देवी,छन्नूलाल मिश्र जइसन संगीत क पारंगत महान शख्सियत लोग बनारस के शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में भी विश्व के पटल पर ले गए ,ओनकर ई योगदान बनारस क लिए बहुत महत्वपूर्ण बा | साहित्य,संगीत अउर कविता के उन्नति में बनारस क एतना योगदान बा कि लिखअ बैठअ त कई किताब भर जाई | विश्व के पटल पर बनारस क एतना नाम हौ एम्मन बनारस क साहित्यिक इतिहास क भूमिका भी महत्त्वपूर्ण हौ ,कउनो-कउनो जगह क नाम इतिहास में अमर हो जाला त ओकरे पीछे साहित्य क बहुत बड़ा कारन होला | जहाँ क साहित्य उन्नत हौ,ऊ जगह क नाम कभो मिट ही नाही सकत | अब थोड़ा सा खाये पियअ क बात करी त ए मामले में भी बनारस क नाम बहुत मशहूर हौ ,बढ़िया चीज़ और सस्ता चीज़ आराम से हर जगह मिल जाई | सवेरे-सवेरे चाहे कचौड़ी -जलेबी क बात हौ ,चाहे शाम के गोलगप्पा क ठेला ,सब कुछ स्वादिष्ट अइसन कि स्वाद भूलले न भुलाय | बनारस क खास मिठाई लौंगलता अउर कहीं देखईबो नाही करत | दशाश्वमेध घाट से जइसे गोदौलिया के तरफ आगे बढ़अ ,कई चाट भंडार हौ, दूकान पर सजल चाट-पकौड़ी देख के मुँह में पानी आ जाई | ठंडई अउर पान त अइसन चीज़ बा कि बाहर से आवे वाले लोग बिना एकर स्वाद लिये अगर वापस चल जाये त समझअ बनारस आइल अधूरा रह गईल | बनारस पूर्वी उत्तर प्रदेश क सबसे विकसित शहर हौ,बिहार से सटल होये के कारन उत्तर प्रदेश और बिहार क मिलल-जुलल स्वरूप देखअ के मिलला | मंदिर ,घाट,बाजार ,खाना-पीना ,अस्पताल हर जगह पूरे विश्व क लोग दिखाई दे जइहन |विदेशी लोग बनारस से बहुत प्रभावित हयन एम्मन कउनो दो राय नाही हौ लेकिन भारत क विभिन्न प्रान्त क लोग भी बनारस में रहअ और जुड़अ पसंद करलेन |कुछ अइसही कारन हौ या कही कि बनारस क जादू हौ कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जी भी चुनाव लड़अ खातिर पूरे भारत में बनारस चुनलेन ,एकरे पाहिले भी मुरली मनोहर जोशी जी बनारस से संसद भइलेन | बड़ा-बड़ा नेता चुनाव में बाबा विश्वनाथ जी क आशीर्वाद लेवत देखाई देहलेन | एक टाइम कमला पति त्रिपाठी जी बनारस क टॉप के नेता रहेन अउर बनारस के लिए किहेन भी बहुत | अब नरेंद्र मोदी जी और बाकी बड़े बड़े नेता लोगन से भी उम्मीद हौ कि बनारस के अउर बेहतर बनईहन | अबही बनारस जो पूर्वांचल क भी महत्वपूर्ण हिस्सा हौ ऊहाँ उद्योग-धंधा क बहुत कमी हौ और इहे कारन हौ जो बनारस सहित पूर्वांचल और बिहार क लोग भारत के अलग अलग हिस्से में जाके शारीरिक और मानसिक श्रम करके ऊ जगह क आर्थिक उन्नति करलेन | ई कउनो ख़राब बात नाही हौ,भारत क विकास त होतअ हौ मगर अगर पूर्वांचल में रहके ऊ मेहनत करके पूर्वांचल क तरक्की करैं त पूर्वांचल ,बनारस ,पूर्वी उत्तर प्रदेश अउर मजबूत होई अउर अइसे भी देश त मजबूत होवे करी | बनारस क माटी ही कुछ अइसन हौ कि इहाँ जन्म लेवअ वाला लोग अगर कउनों काम के ठान लें त बाबा सफल होके देखा देईहन | अउर बाहर क लोग इहाँ से आकर्षित होये बिना रह नाही सकतेन | बनारस क संस्कृति बहुत पुराना बा लेकिन आजतक चल रहल ,ई अइसन संस्कृति बा जहाँ पर पूरे विश्व क लोग सिर झुकावलेन | ई अइसहिन नाही बनल हौ एकरे पीछे बहुत महान लोगन क कोशिश और त्याग हौ | एके केहू क नजर न लग जाये ,ए खातिर बनारस के अउर बनारस के संस्कृति से प्यार करअ वाले लोगन के आगे आवे के परी | खाली बचाना नाही बल्कि काशी के संस्कृति और सभ्यता के आगे ले जाये के होइ | इहाँ क रहन-रहन,बोली – बानी सब कुछ सभ्यता क हिस्सा हौ अउर इहे इहाँ क पहचान हौ | वइसे त काशी क ई पहचान कभो नाही मिट सकत फिर भी खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगन के मिलके साझा प्रयास करअ क चाही |

  • विनोद पांडेय

गाजियाबाद

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