आपन बात

आभाषी दुनिया के मकड़जाल मे अझुराइल अदमी के लग्गे अपने भाषा के लेके केतना समय बा , एकर उत्तर खोजे के जरूरत नइखे । उत्तर सगरों छीटाइल बा , देखि समझी आउर बिचारी । ना जाने केतनी भोजपुरी के पत्र पतिरका कब शुरू भइनी स , आ कब बन्न हो गइनी स , केतना जाने के मालूम बा ? ओहमे एगो पतिरका इकाई के अंक से दहाई के अंक मे पहुँच रहल बा , सराहे जोग बा । जवन समाज अपने कर्मठता ला जानल जाला , आज उहे समाज आपन ऊर्जा के सही गति आ सही जगह देवे मे गुमराह होत दिखाई दे रहल बा । जहवाँ आज ई भाषा अपने मान्यता खाति अपनही लोगन के शिकार भइल बा , उहवें रचनाकर्म करे वाला लोगन उचित सनमान मिले एकरो ला जुझत बा ।

 

भोजपुरी साहित्य सरिता के टीम एगो लक्ष्य लेके निकलल बिया कि भोजपुरी के लेके जवन कुविचार लोगन के मन मे बा , उ दूर होखे । नवहा लोगन के जुड़ाव बढ़े , पुरनकी पीढ़ी आपन अनुभव आ ऊर्जा नवहन के सँवारे मे लगावे । संस्कार फरे फुले आ नवकी पीढ़ी ओह से सराबोर रहे । एही मंतर के संगे अनथकले आगु बढ़े के परयास चल रहल बा । नया लोगन के हर बेरी जोड़ल आ पुरान लोगन के आशीष के लेवे खाति हरदम तइयार भोजपुरी साहित्य सरिता के टीम अपने एह परयास मे केतना सफल बा, एह पर राउर सभे के प्रतिक्रिया के हरमेसा हमनी के जोहत रहेनी सन । राउर सभे के प्रतिक्रिया हमनी के सीखे आ कुछ नया करे के तागत देत रहेले ।

 

एह अंक में भोजपुरी कविता, कहानी, समीक्षा, अनुवाद, लघुकथा, व्यंग्य के संगे संगे कुछ अनछुवल प्रसंगो बा । भोजपुरी साहित्य सरिता के सम्पादन मंडल के सभे संगी साथी के ऊपर हम उ तमाम कलमकार लोगन के आभार करत बानी जे हरेक महीना बिना नागा के आपन रचना भेजि पत्रिका के सुचारू रूप में चलावे में योगदान दे रहल बा , बिना उनके सबके सहयोग के इ साहित्य आन्दोलन अधूरा बा उनके जोगदान के सराहना बा , सनमान बा । नया बरिस मे पतिरका के सजवे सँवारे के भूमिका केशव जी अपना ऊपर लीहले बाड़न ,उनका के विशेष बधाई बा । इहवाँ हम अपने टीम के संतोष पटेल जी के एगो लाइन जस के तस उल्लेखित क रहल बानी –

 

“विशेषकर श्री जे पी द्विवेदी जी के एह पत्रिका में सक्रीय भूमिका के उल्लेखित ना कइल जाए त इ साहित्यिक बेइमानी कहल जाई. उहाँ के ऊर्जा हमनियो के सक्रिय बना देवे ला इहे समपर्ण एगो पत्रिका के जिनगी दे सकेला.”

 

हमनी के पत्रिका क जनवरी अंक रउरा सभे के सोझे परोस रहल बानी जा  अब रउरा सभे न्याय करीं आ आपन विचार से अवगत कराई. इहे भाव आ सनेह के संगे ……..

राउर आपन–

डॉ ऋचा सिंह

असोसिएट प्रोफेसर

हरिश्चंद्र महाविद्यालय , वाराणसी

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