आग लगै परधानी में

अस भूत चढ़ल नेतागिरी के
जहर घोराईल बानी में
हे लोकतंत्र मुँहझऊसु
तोहरे आग लगै परधानी में।
मोह भईल कुरता क अईसन
बाउर सबै हव सानी में
पान घुला के थूकत मनई
अँगना अऊर दलानी में।
गुटबन्दी दलबन्दी होखै
जाने कवन गुमानी में
गजबै खद्दर खूब लड़उलस
खपरा छान करानी में।
मीत हीत सबही अझुरायल
झगरा होय परानी में
“योगी” आँख मुदायल बाटे
तब्बो कवन नदानी में।
हे लोकतंत्र मुँहझऊसु
तोहरे आग लगे परधानी में।।
  • योगेन्द्र शर्मा ‘योगी’

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