असों आइल फागुन

रस भरल चारु ओर पोरे पोर सजनी

असों आइल फागुन झकझोर सजनी।।

चंचल चितवन चान सुरुज बुझाला

नेहिया मातल मन अनासो बउराला

मारे हिया में हिलोर सजोर सजनी

असों आइल फागुन झकझोर सजनी।।

अंग अंग चढ़े लागल बेसुध लहरिया

सोsना चानी से भरल सगरो डढ़िया

हाँक कोइलर लगावे होते भोर सजनी

असों आइल फागुन झकझोर सजनी।।

चनिया के रतिया में चानस जगा दीं

आव गुजरिया रंग प्यार के लगा दीं

बात मानs नाही करब बरजोर सजनी

असों आइल फागुन झकझोर सजनी।।

 

 

  • केशव मोहन पाण्डेय

 

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