अउर तिवारी का हाल हौ ?

बहुत दिना के बाद देखअइलअ ,
एकदम से दूबराय गयअ ,
अब का करअ धरअ अइलअ तू 
धरम-करम जब खाय गयअ
जब बीमार रहलीन माई तब
कउनो खबर न लेवै अइलअ
गुजर गएन जब माई-बाउ ,
तब के के का देवै अइलअ

गाँव देखकर के का करबअ
उहै ऊँच हौ ,उहै खाल हौ ||

होतअ बँटवारा भग गइलअ
सब कुछ बेच-बाच के आपन
तीउराइन क सपना टूटल
टूटल माई-बाउ क मन
बेटवा जब पलने में रहल ,
तब आवारागर्दी सुझलेस ,
बाबू कइसे घर चलईलेन
केहु नाही गरीबी बुझलेस

कइसे जियत हइन तीउराइन
उप्पर वाले क कमाल हौ ||

दारू के चस्का में आके ,
सब रूपिया बिलवाय दीहअ ,
लगत हयअ पूरा भिखमंगा
ई हालत पहुँचाय दीहअ ,
तब रहलअ स्प्रिंग मतिन ,
काहे एतना अब सिकुर गयअ ,
आज याद आइल परिवार,
जब एकदम से निपुर गयअ ,

गाल सूख के छाल हो गइल
मुँह लटकल हौ,आँख लाल हौ ||

कइलअ त तू बहुतअ गलती
मगर चलअ करबअ का तू अब
पश्चाताप कर लीहअ सुनके
गाँव मोहल्ला सब थूकी जब
भले बुढ़ाई में अइलअ तो
अब मत अइसे मुँह लटकावा
लड़िका का बिआह पड़ल हौ
समधी बनके नाचअ गावअ

चेहरा देख लागत हौला कि
तोहके भी एकर मलाल हौ ||
अउर तिवारी का हाल हौ ?

–विनोद पांडेय

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